‘खेल और पढ़ाई दोनों में बेहतर होना मुश्किल’

नोएडा। खेलरत्न, सं : Time, 9:30, PM.
शहर के प्रतिष्ठित कैंब्रिज स्कूल में 34 साल तक खेल विभाग को संभालने वाले आजाद सिंह 31 अगस्त को सेवानिवृत हुए। खेल और शिक्षण दोनों में इतने लंबे समय तक अनुभव रखने वाले आजाद सिंह राष्ट्रीय स्तर के जिमनास्ट रहे हैं। उन्होंने खेल और शिक्षा दोनों के सामंजस्य पर खेलरत्न डॉट ओआरजी संवाददाता से विभिन्न पहलुओं पर बातचीत की।

 

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अपनी सेवा के आखिरी टूर्नामेंट के आयोजन के दौरान आजाद सिंह (सफेद कपड़ों में)

आजाद सिंह ने नागपुर विश्वविद्यालय से फिजिकल एजुकेशन की शिक्षा ली। इसी दौरान उन्होंने 1976 और 1977 में राष्ट्रीय अंतर विश्वविद्यालय जिमनास्टिक प्रतियोगिता में भी भाग लिया। आजाद सिंह बताते हैं कि लक्ष्य प्राप्ति के लिए खेल या पढ़ाई किसी एक पर विशेष फोकस करना होगा। अगर आप सोचेंगे कि पढ़ाई के साथ ही खेल में भी विश्वपटल पर अपना नाम र्स्वणाक्षरों से लिखे तो ऐसा असंभव है। अरबों में ऐसे विरले ही ऐसा होते हैं जो दोनों में श्रेष्ठ होते हैं। लिहाजा अगर आपको खेल में रुचि है और आप बेहतर करना चाहते हैं तो खेल में पूरा दम लगा दीजिए। इसी तरह पढ़ाई में भी है। अगर पढ़ना चाहते हैं तो शत प्रतिशत पढ़ाई को समय दीजिए। परिणाम बेहतर होंगे। अगर हम खेल और पढ़ाई दोनों में बेहतर होना चाहते हैं तो समय प्रबंधन जरुरी है,लेकिन ज्यादातर छात्रों के लिए यह कर पाना मुश्किल है।

खिलाड़ियों की मदद करें स्कूल प्रबंधन
आजाद सिंह बताते हैं कि खिलाड़ियों को पढ़ाई और खेल में सामजस्य बैठाने की जरुरत है। वहीं स्कूल प्रबंधन भी होनहार खिलाड़ियेां की मदद करे, क्योंकि कई बार ऐसा होता है कि कोई खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर पर खेल रहा है और उसे एक दो नंबर कम होने पर फेल कर दिया जाता है। जो मेरे हिसाब से गलत है। क्योंकि किसी खिलाड़ी के राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने में प्रतिदिन 4-5 घंटे अभ्यास के लिए देने पड़ते हैं। ऐसे में पूरी तरह पढ़ाई कर पाना संभव नहीं होता है।

खेल भी सबकुछ दे सकता है
आजाद सिंह बताते हैं कि अगर आप खेल में बेहतर हैं तो यह आपको सबकुछ दे सकता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को विभिनन राज्यों में नौकरी, नकद इनाम आदि की व्यवस्था है। वहीं ओलंपिक, एशियाई, विश्व चैंपियनशिप आदि प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को लिए भी अच्छी नौकरी और इनाम का प्रावधान है। ऐसे में अगर खेले तो खूब खेले। खेल सबकुछ दे सकता है। कुछ परेशानी और दिक्कतें भी हैं, जिसे ठीक करने की जिम्मेदारी सरकार की है। उम्मीद है कि भविष्य में इन दिक्कतों से खिलाड़ी पार पा पाएंगे।

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