तीन साल पहले हारने पर खूब रोई थीं समायरा, अब बनीं राष्ट्रीय चैंपियन

-2015 में अंतर स्कूल प्रतियोगिता में हारी थीं, घर आकर रोईं
-इसके बाद समायरा को मलेशिया प्रशिक्षण के लिए भेजा गया
नोएडा। खेलरत्न, सं : Time, 10:20, PM.
समायरा तीन साल पहले एक अंतर स्कूल टूर्नामेंट में हार गईं। यह उनकी जिंदगी का पहला मैच था। घर आकर वह खूब रोईं। इसके बाद 10 वर्षीय इस शटलर को उनके माता पिता ने बेहतर बैडमिंटन प्रशिक्षण दिलाने का वादा करते हुए उन्हें मलेशिया भेजा। रविवार को समायरा अंडर-13 का राष्ट्रीय चैंपियन बनकर तीन साल पहले की हार की टीस को समाप्त कर दिया। किसी भी वर्ग में वह जिले की पहली खिलाड़ी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप जीती हो। राष्ट्रीय प्रतियोगिता आंध्र प्रदेश में समाप्त हुई।

 

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विजेता ट्रॉफी के साथ समायरा पंवार

ग्रेटर नोएडा के जेपी ग्रींस निवासी समायरा पंवार ने फाइनल में नव्या कंडेरी को रोमांचक मुकाबले में 21-16, 17-21, 19-21 मात दी। पहले सेट हारने के बावजूद भी उन्होंने शानदार जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया। सेमीफाइनल में भी वह पहला सेट हारने के बाद जीत दर्ज की थीं। अंडर-13 में जीत के बाद अब वह अंडर-15 और 17 में भाग लेंगी। ग्रेटर नोएडा के जेपी ग्रींस निवासी यह खिलाड़ी इससे पहले राष्ट्रीय रैकिंग प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम कर चुकी हैं।

तीन साल के खेल में ही बनी राष्ट्रीय चैंपियन
समायरा ने महज तीन साल के खेल में ही राष्ट्रीय चैंपियन तक का सफर तय किया। जेनेसिस स्कूल नोएडा की आठवीं कक्षा की छात्रा को सबसे पहले अंतर स्कूल प्रतियोगिता में खेलने का मौका मिला। इस समय उन्होंने बैडमिंटन नहीं खेला था। लिहाजा 2015 में हुई इस टूर्नामेंट के पहले मैच में ही हार गईं। घर आने पर वह खूब रोईं। इसके बाद पिता अमित पंवार और मां अंजलि पंवार ने उन्हें बैडमिंटन का प्रशिक्षण दिलाने का निर्णय लिया। 10 वर्षीय इस नन्हीं खिलाड़ी का बेसिक प्रशिक्षण मलेशिया में शुरू हुआ। इसके बाद वह ग्रेटर नोएडा के गोपीचंद एकेडमी में प्रशिक्षण शुरू किया। उनकी मां अंजलि पंवार बताती हैं कि समायरा को बैडमिंटन की पहली सीख मलेशिया में ही मिली। बेटी ने राष्ट्रीय चैंपियनशिप का खिताब जीतकर हमें गौरवान्वित किया है।

प्रशिक्षण के साथ ही योग पर भी विशेष ध्यान
समायरा प्रतिदिन छह घंटे अभ्यास करती हैं। सुबह पांच बजे से दिनचर्या शुरू करने वाली समायरा सुबह तीन घंटे अभ्यास करती हैं। करीब 10 बजे से वह दो घंटे आराम करती हैं। शाम को दो घंटे तक फिटनेस और योग के लिए समय देती हैं। योग पर भी उनका विशेष ध्यान है। पढ़ाई के लिए साढ़े सात बजे से साढ़े नौ बजे तक का समय निर्धारित है। समय रहने की स्थिति में वह स्कूल जाती हैं। जेनेसिस ग्लोबल स्कूल की आठवीं कक्षा की यह छात्रा हफ्ते में दो-तीन दिन ही स्कूल जा पाती है।

लगातार छू रहीं बुलंदियां :
-यूपी स्टेट बैडमिंटन चैंपियनशिप अंडर-15 और 17 की विजेता रहीं
-आईसीएसई बोर्ड राष्ट्रीय बैडमिंटन चैंपियनशिप अंडर-17 की विजेता
-राष्ट्रीय स्तर की कई रैंकिंग प्रतियोगिता की विजेता बनीं
-अंडर-13 में देश की नंबर दो खिलाड़ी हैं
-अंडर-15 में भी इनकी राष्ट्रीय रैंकिंग 28 है

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