विशेषज्ञ शिक्षक ही पढ़ाएंगे स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा विषय

नई दिल्ली : खेलरत्न, सं, Time, 10:55, PM. 
नौवीं से बारहवीं तक के छात्रों को स्वास्थ्य-शारीरिक शिक्षा किसी अन्य विषय के नहीं बल्कि फिजिकल एजुकेशन के शिक्षक ही पढ़ाएंगे। सीबीएसई ने 21 मार्च को सभी संबद्ध स्कूलों को शारीरिक शिक्षा की पढ़ाई अनिवार्य करने संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद से इस विषय से संबंधित गतिविधियां एक घंटा पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन जब 25 अप्रैल को सीबीएसई ने दूसरा सर्कुलर जारी कर उक्त विषय को किसी भी अन्य विषय के शिक्षक द्वारा पढ़ाने का निर्देश दिया तो इसका विरोध भी हुआ। फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया (पेफी) ने इस संबंध में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर उनका ध्यान आकर्षित कराया था। पेफी के पत्र के बाद सीबीएसई ने विशेषज्ञ शिक्षकों से ही स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा पढ़ाने की बात मान ली है। जिसे शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में पेफी की बड़ी जीत मानी जा रही है।

piyush jain
फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव डॉ. पीयूष जैन

फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया एक दशक से अधिक समय से शारीरिक शिक्षा को स्कूलों में अनिवार्य करने को लेकर अभियान चला रखा था। वहीं इस विषय को इसी से संबंधित शिक्षक द्वारा पढ़ाने की भी अपील की थी। पेफी ने सीबीएसई के दूसरे निर्णय के बारे में कहा था कि हर हाल में शारीरिक शिक्षा विषय की पढ़ाई अनुभवी और विषय से संबंधित शिक्षकों से ही कराई जानी चाहिए। जिससे बच्चों को सही शिक्षा मिल सके। साथ ही किसी तरह का नकारात्मक असर न पड़े। फाउंडेशन के राष्ट्रीय सचिव डॉ पीयूष जैन ने बताया कि एक पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री के ध्यानार्थ लाया गया था कि फिजिकल एजुकेशन और हेल्थ एक ऐसा विषय है जो विशेषज्ञ द्वारा ही पढ़ाया जाए तो उसका परिणाम काफी सकारात्मक होता है। इसे किसी अन्य शिक्षक के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। डॉ पीयूष जैन ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय का पत्र हाल ही में फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन को मिला है, जिसमें सीबीएसई द्वारा यह जवाब दिया गया है कि विशेषज्ञ टीचर ही उक्त विषय को पढ़ाएंगे और रिकॉर्ड आदि रखने में क्लास एवं अन्य टीचरों की मदद ली जा सकती है। फिजिकल एजुकेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री के इस निर्णय पर आभार व्यक्त किया है। पेफी ने आशा व्यक्त की है कि इस निर्णय से शारीरिक शिक्षा और खेल के क्षेत्र में रोजगार के असीम द्वार खुलेंगे। छात्रों को उक्त विषय में गुणात्मक शिक्षा मिलेगी जिससे की देश को खेल महाशक्ति बनाने में मदद मिलेगी।

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