छक्के-चौके से कम पर नहीं मानते सहवाग के बेटे आर्यवीर

-आर्यवीर मंगलवार को एपीजे स्कूल में खेली जा रही अंतर स्कूल क्रिकेट प्रतियोगिता खेलने आए थे
-नजफगढ़ के सुल्तान वीरेंदर सहवाग की तरह ताबड़तोड़ क्रिकेट खेलना चाहते हैं
नोएडा। खेलरत्न सं, Time, 11:30, PM.
विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग के बेटे आर्यवीर भी छक्के-चौके से कम पर नहीं मानते। पिच पर उतरते ही गेंद को बाउंड्री तक पहुंचाना उनका मकसद होता है। अपने पिता की तरह ही तकनीक के साथ ही ताबड़तोड़ खेल पर आर्यवीर विश्वास करते हैं। 10 वर्ष का यह नन्हा बल्लेबाज डॉ. सत्य पॉल मेमोरियल अंडर-14 क्रिकेट में भाग लेने मंगलवार को एपीजे स्कूल में आया था। संस्कृति स्कूल का प्रतिनिधित्व करने वाले आर्यवीर पहले मैच में महज 7 रन ही बना सके।

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पहले मुकाबले में आर्यवीर महज 7 रन ही बना सके, लेकिन इतने रन बनाने में ही एक छक्का जड़ा। तीन गेंदों की इस छोटी सी पारी में उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद थी, लेकिन खुद को पिच पर संभाल नहीं सके। हालांकि इससे पहले कई अंतर स्कूल टूर्नामेंट में वह शानदार प्रदर्शन कर टीम को जीत दिलाई है। सात साल की उम्र से क्रिकेट की शुरुआत करने वाले आर्यवीर का अंतर स्कूल क्रिकेट प्रतियोगिता में सर्वाधिक स्कोर 80 है। वह कई अर्धशतक जड़ चुके हैं। आर्यवीर बताते हैं कि उन्हें आक्रामक बल्लेबाजी पसंद है, लेकिन गेंदबाजी में भी रुझान रखते हैं। गेंद से भी खुद को साबित करने के लिए वह स्पिन गेंदबाजी भी करते हैं। वह बताते हैं कि बल्लेबाजी के दौरान मैं हमेशा अधिक से अधिक रन बटोरने का प्रयास करता हूं। पिता की तरह ही खेलना चाहता हूं। जब वह घर में होते हैं तो वह मुझे खुद भी प्रशिक्षित करते हैं। उनके प्रशिक्षक अश्विनी बताते हैं कि वीरेंदर सहवाग की तरह ही आर्यवीर खेलते हैं। उनके शॉट मारने का अंदाज भी बिल्कुल पिता की तरह ही है। कम गेंदों में अधिक से अधिक रन बटोरने की ख्वाहिश आर्यवीर रखते हैं। तीन सालों में जितने मैच खेले सभी में कम गेंदों पर अधिक रन बटोरे। हाल ही में दिल्ली के सूरजमल जैन पब्लिक स्कूल में खेले गए अंतर स्कूल क्रिकेट प्रतियोगिता में उन्होंने सर्वाधिक 42 रन बनाए और मैन ऑफ द टूर्नामेंट भी बने।

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